एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

मिलावटियों ने आपकी जिंदगी में "जहर" घोल दिया है !

मैं आज इंदौर में हूं। यहां के अखबारों में एक खबर बड़े जोरों से छापी है कि भिंड-मुरैना में सिंथेटिक दूध के कई कारखानों पर छापे मारे गए हैं। राजस्थान और उप्र के पड़ौसी प्रांतों के सीमांतों पर भी नकली दूध की ये फेक्टरियां मजे से चल रही हैं। इस मिलावटी दूध के साथ-साथ घी, मक्खन, पनीर और मावे में भी मिलावट की जाती है। दिल्ली, अलवर तथा देश के कई अन्य शहरों से भी इस तरह की खबरें आती रही हैं।
फलों को चमकदार बनाने के लिए उन पर रंग-रोगन भी चढ़ाया जाता है और सब्जियों को वजनदार बनाने के लिए उन्हें तरह-तरह की दवाइयों के इंजेक्शन भी दिए जाते हैं। यह मिलावट जानलेवा होती है। दूध में पानी मिलाने की बात हम बचपन से सुनते आए हैं लेकिन आजकल मिलावट में ज़हरीले रसायनों का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसीलिए देश में लाखों लोग अकारण ही बीमार पड़ जाते हैं और कई बार मर भी जाते हैं। लेकिन सरकार ने इन मिलावटियों के लिए जो सजा रखी है, उसे जानकर हंसी आती है और दुख होता है।
यह मिलावट सिर्फ दूध में ही नहीं अभी कितना ही खतरनाक मिलावटी को पकड़ा जाए, उसे ज्यादा से ज्यादा तीन महिने की सजा और उस पर 1 लाख रु. जुर्माना होता है। वह मिलावट करके लाखों रु. रोज कमाता है और तीन माह तक वह सरकारी खर्चे पर जेल में मौज करेगा। वाह री सजा और वाह री सरकार ! कौन डरेगा, इस तरह के अपराध करने से ? मोदी सरकार को चाहिए था कि मिलावट-विरोधी विधेयक वह संसद की पहली बैठक में ही लाती और कैसा विधयेक लाती ? ऐसा कि उसकी खबर पढ़ते ही मिलावटियों की हड्डियों में कंपकंपी दौड़ जातीं।
मिलावटियों को कम से कम 10 साल की सजा हो और उनसे 10 लाख रु. जुर्माना वसूलना चाहिए। खतरनाक मिलावटियों को उम्र-कैद और फांसी की सजा तो दी ही जानी चाहिए, सारे देश में उसका समुचित प्रचार भी होना चाहिए। उनका सारा कारखाना और सारी चल-अचल संपत्ति जब्त की जानी चाहिए। मिलावट करनेवाले कर्मचारियों के लिए भी समुचित सजा का प्रावधान होना चाहिए। मिलावट को रोकने का जिम्मा स्वास्थ्य मंत्रालय का है। स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. हर्षवर्द्धन थोड़ा साहस दिखाएं तो हर सांसद, वह चाहे किसी भी पाटी का हो, उनके इस कठोर विधेयक का स्वागत करेगा। यह इस सरकार का सर्वजनहिताय एतिहासिक कार्य होगा।
डॉ. वेदप्रताप वैदिक