एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

देर न हो जाए कही



हिन्दू पुराणों में उल्लेख है कि कलियुग के अंतिम चरण में पृथ्वी पर जब पाप का बोझ ज्यादा बढ़ जाएगा तो पाप का अंत कर धर्म और मानवता की स्थापना के लिए भगवान का कल्कि अवतार होगा। इस्लाम में भी पृथ्वी के अंतिम दिनों में पाप और अन्याय मिटाने के लिए एक मेहंदी के प्रकट होने की बात कही गई है। इस्लाम के शिया सम्प्रदाय के अनुसार बारहवे इमाम मेहंदी किसी गुप्त ज़जीरे में प्रकट हो चुके हैं और विश्व के अंत के पहले ही सामने आएंगे। सुन्नी मान्यता के अनुसार मेहंदी अभी प्रकट नहीं हुए हैं। 

हदीसों के अनुसार हज़रत मुहम्मद कहते हैं - 'जब तक मेरी जनजाति और मेरे नाम का आदमी अरब प्रायद्वीप का अधिपति नहीं होगा तबतक विश्व का अंत नहीं होगा। मेहंदी मेरे जैसा ही सर्वगुण संपन्न होगा जो इस दमन से भरे विश्व में निष्पक्षता और न्याय की स्थापना करेगा।' चाहे कल्कि अवतार हो या मेहंदी, दुनिया के जिस भी देश में उनका आगमन हो, वे व्यक्ति के रूप में आएं या विचार के रूप में, उद्देश्य तो एक ही है - पृथ्वी पर हिंसा, क्रूरता और अन्याय का खात्मा कर एक बेहतर, मानवीय, न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना। अब लगता नहीं कि इस क़ातिल और बेरहम दुनिया में तिल-तिल मरती इंसानियत को कोई राजनीतिक या धार्मिक व्यवस्था बचा ले जाने में सक्षम है। पता नहीं अवतार या मेहंदी सच्चाई है अथवा लोगों की उम्मीदों को जिन्दा रखने के लिए रची गई कोई फैंटेसी, लेकिन अब तो देश-दुनिया की वर्तमान परिस्थितियों से हताश हमारे जैसे अविश्वासी लोगों को भी किसी ऐसे ही अवतार या मेहंदी का इंतज़ार है।

ईश्वर और अल्लाह के नाम पर आ जाओ, प्रभुओं ! कहीं आपके आने में इतनी देर न हो कि मनुष्य नाम की यह विचित्र प्रजाति आपस में ही लड़-मरकर समाप्त हो जाए !

- ध्रुव गुप्त