"..निश्चय ही उनकी मृत्यु के पीछे कई रहस्यमय कारण हो सकते है पर नारायण दत्त तिवारी द्वारा "नेहरू युवा केन्द्र" के नाम से देश भर में खड़ी की गई अरबों खरबों की अचल संम्पति के लिये संघर्ष एक संभावित कारण हो सकता है । इस संघर्ष के केंद्र में लंबे समय से तिवारी जी के पूर्व राजनैतिक काकस/कोटरी की आपसी प्रतिद्वंतिता है जिसमे से हर कोई उन संपत्तियों पर काबिज होने के लिये अपने अपने ढंग से राजनैतिक बिसात बिछाता रहा है।"
पुत्र का अधिकार हासिल करने के लिए वर्षों तक राजनीति के पुरोधा नारायण दत्त तिवारी से कानूनी लड़ाई लड़ उन्हें नाकों चने चबाने को मजबूर करने वाले रोहित शेखर की अचानक मृत्यु की खबर पर सहसा किसी को भरोसा नही हुआ। पहले उनके हार्ट अटैक का शिकार होने की बात कही गयी पर जल्द ही पोस्टमार्टम के बाद उनकी हत्या किए जाने के हैरतअंगेज खुलासे ने सबको भौचक्का कर दिया ।
उनका छोटा सा जीवन अपमान के कड़वे घूंट पीने और जगहंसाई के बीच पिता का प्यार और पुत्र का अधिकार पाने के संघर्ष की एक पीड़ादायक दास्तान है ।निश्चय ही उनकी मृत्यु के पीछे कई रहस्यमय कारण हो सकते है पर नारायण दत्त तिवारी द्वारा "नेहरू युवा केन्द्र" के नाम से देश भर में खड़ी की गई अरबों खरबों की अचल संम्पति के लिये संघर्ष एक संभावित कारण हो सकता है । इस संघर्ष के केंद्र में लंबे समय से तिवारी जी के पूर्व राजनैतिक काकस/कोटरी की आपसी प्रतिद्वंतिता है जिसमे से हर कोई उन संपत्तियों पर काबिज होने के लिये अपने अपने ढंग से राजनैतिक बिसात बिछाता रहा है।
हालांकि तिवारी जी बेहद सूझबूझ वाले विजनरी राजनीतिज्ञ थे और उनकी छवि पर भी कभी किसी घोटाले का दाग नही लगा पर उनकी "आशिकमिजाजी" और "सेक्स मैनियक" व्यक्तित्व उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया । उनकी इस प्रबल कमजोरी के चलते न केवल उनकी सारी प्रतिभा नेपथ्य में चली गयी बल्कि उनके व्यक्तित्व में एक किस्म का दब्बूपन आ गया । एक समय अपनी काबलियत के दम पर प्रधानमंत्री बनने की दहलीज तक पहुंचे नारायण दत्त अहम राजनैतिक मौकों पर अक्सर ब्लैक मेलिंग का शिकार हो ढुलमुल रवैया अपनाने को मजबूर हो जाते ।
"उज्वला सिंह" हरियाणा के प्रतिष्ठित नेता और पूर्व मंत्री "स्वर्गीय शेर सिंह" की पुत्री थी जो बहुत कम उम्र में ही विपिन शर्मा से प्रेम विवाह कर "उज्वला शर्मा" बन गयी ।तिवारी जी 1969 मे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे उसी वक्त उनकी निगाह खूबसूरत उज्वला शर्मा पर गयी और अपनी आशिकमिजाजी के चलते शेर सिंह के घर आने जाने लगे यहां तक उनके घर पर ठहरने लगे ।
तिवारी जी का व्यक्तित्व आकर्षक था और उसवक्त के उभरते हुए नेता पर उज्वला अपने पूर्व पति के वैवाहिक बंधन के प्रति समर्पित तो थीं पर महत्वाकांक्षी भी बहुत थी । बस तिवारी जी ने उम्र में खुद से 28 साल छोटी उज्वला शर्मा को हासिल करने के लिए इसी महत्वाकांक्षा को अपनी सीढ़ी बना ली ।
इसी महत्वाकांक्षा और ऐयाशी के मिलन से 1979 में अनचाहे रोहित शेखर तिवारी का जन्म हुआ जबकि एन डी तिवारी और उज्वला शर्मा दोनो पहले से ही शादीशुदा थे । तिवारी जी को उज्वला शर्मा का शादीशुदा होना सुरक्षित लगा और उन्हें लगा कि ये राज कभी नही खुल पायेगा ।
समय बिताता रहा पर समय के साथ साथ तिवारी जी के नये नये किस्से कहानियां भी सत्ता के गलियारों में सुनी सुनाई जाने लगी ...उनकी फेहरिस्त में अनगिनत नाम जुड़ते चले गये । जब उनके किस्से चर्चा-ए-आम होने लगे और तिवारी जी ने उज्वला को उपेक्षित कर आगे बढ़ने की कोशिश की तो उनकी महत्वाकांक्षा चूर चूर होती दिखी । असुरक्षा की भावना से ग्रसित उज्वला का स्त्रीत्व और स्वाभिमान जाग उठा ।
तिवारी जी के नन्हे रोहित और खुद के साथ के बहुत से फोटोग्राफ्स उज्वला ने ऐसी ही आशंका के चलते सुरक्षित रखे थे । इन्ही को दिखा कर उज्वला ने खुद को राजनैतिक उत्तराधिकार और रोहित को पिता का नाम देने के लिए दबाव बनाना शुरू किया ।पर उस वक्त तिवारी जी की प्रथम पत्नी डॉ सुशीला तिवारी जीवित थीं । लोकलाज और राजनैतिक नफा-नुक्सान की दुहाई और आश्वासनों की घुट्टी से किसी तरह से वो उज्वला को दिलासा दे दे कर कोई बड़ा कदम उठाने से रोकते रहे ।
....... शेष अगली पोस्ट मे
Political Analyst लखनऊ निवासी
मनोज कुमार मिश्रा द्वारा यह लिखा गया है .किसी भी तरह की तथ्यात्मक भूल के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होंगे.M7News इसे प्रमाणित नहीं करता है.