एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

वापस लौटी है गांधी-नेहरू के दौर की विचारधारा


उपभोग के बड़े बाजार में गांधी-नेहरू के विचार अप्रासंगिक दिखाई देते हैं। क्या लोगों को इधर लौटाना आसान होगा?
कांग्रेस के घोषणापत्र से लगता है कि पार्टी यूपीए-2 में जिन वैचारिक दुविधाओं में फंसी थी, उससे बाहर आना चाहती है। राहुल गांधी पार्टी को उस वैचारिक छतरी से बाहर ले आए हैं, जिसकी कमानी खुली अर्थव्यव्स्था की नीतियों से बनी थी। वह पार्टी को उस द्वंद्व से बाहर ले आए हैं जिसमें वह 2014 के पहले फंसी थी। इसकी दिशा अब आजादी के आंदोलन की विचारधारा के अनुरूप है। आज की कांग्रेस उस विचारधारा की ओर लौटी है, जिसे चंपारण-सत्याग्रह के बाद पार्टी ने अपनाया था और जो 1930 के ‘पूर्ण स्वराज’ के प्रस्ताव के रास्ते से गुजरकर 1942 के ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव में संपूर्ण हुई थी। किसानों के कर्ज को आपराधिक मामला मानने के बदले सिविल मामला मानने का वादा वास्तव में ऐतिहासिक है।
देश के सबसे गरीब पांच करोड़ परिवारों को गरीबी से बाहर लाने के लिए साल में 72 हजार रुपये देने की बात भी ऐसी ही है। जाहिर है, आजादी के आंदोलन की विचारधारा और आजादी के बाद पैदा हुई नेहरूवादी समझ में पार्टी के वापस लौटने के कारण ही स्वास्थ्य और शिक्षा को निजी के बजाय सरकारी क्षेत्र में आगे बढ़ाने का फैसला हुआ है। घोषणापत्र में बीमा आधारित स्वास्थ्य-सेवा और शिक्षा के निजीकरण की जगह सरकारी स्वास्थ्य-सेवा को मजबूत बनाने और सरकार के पैसे से शिक्षा को सस्ता बनाने का वादा किया गया है। शिक्षा पर जीडीपी का छह प्रतिशत खर्च करने का ऐलान भी इसी का हिस्सा है। सरकार के 22 लाख और पंचायतों के दस लाख खाली पड़े पदों को भरने का वादा है। नई आर्थिक नीति के पहले तक सबसे अधिक रोजगार सरकार ही देती थी। उदारीकरण ने किसानों को जिस बदहाली में डाल दिया था, उससे निपटने के लिए तय हुए कदम भी वाम की ओर झुकी दृष्टि से निकले हैं।
पार्टी ने पाकिस्तान से लड़ने के नाम पर उभरे राष्ट्रवाद से पैदा हुए राजनीतिक दबाव के बावजूद कश्मीर को लेकर नई नीति बनाने का फैसला किया है। उसने कहा है कि धारा 370 को खत्म नहीं किया जाएगा क्योंकि यह इस राज्य के भारत में विलय का आधार है। आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में संशोधन और कश्मीर में सामान्य स्थिति लाने के लिए सभी पक्षों से बात करने का वादा भी उसने किया है, जबकि बीजेपी ने सख्ती का तरीका अपना कर बातचीत के रास्ते बंद कर रखे हैं। उग्र राष्ट्रवादी शक्ति वाली अपनी छवि बनाए रखने के लिए पार्टी राज्य की जनता को अलग-थलग करने का खतरा उठाती रही है। राजद्रोह के कानून को समाप्त करने की कांग्रेस की घोषणा भी एक ऐसा ही महत्वपूर्ण फैसला है। कांग्रेस ने इन स्थापित नीतियों को त्यागने का निर्णय किया है, बावजूद इसके कि बीजेपी चुनावों में इनका इस्तेमाल उसके खिलाफ जरूर करेगी। 
- अनिल सिन्हा,सीनियर जर्नलिस्ट 

विज्ञापन -