एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

किस्सा : जहाँ लोग आदमी को 'मनई' और गर्दन को 'गटई' कहते हैं, वहाँ फ़िराक़ का क्या काम !

उर्दू के मशहूर शायर फ़िराक़ गोरखपुरी, गाँधी जी से प्रभावित थे और हमेशा से राजनीति में आना चाहते थे। इसकी वजह से उन्होंने डिप्टी कलेक्टरी के लिए हुई अपनी नामज़दगी भी ठुकरा दी थी। हालांकि फ़िराक़ साहब को सियासत में लाने का सेहरा जवाहर लाल नेहरू को है। पी.सी.एस से इस्तीफ़ा देने के बाद वह इलाहाबाद चले गए और पंडित नेहरू के साथ मिलकर कांग्रेस पार्टी का काम करने लगे। नेहरू ने उन्हें 250 रुपये महीने पर आॅल इडिया कांग्रेस कमेटी का अंडर सेक्रेटरी बना दिया था। फ़िराक़ साहब ने दिसंबर 1926 से 1927 तक इस पद पर काम किया लेकिन नेहरू के 1927 में अन्तरराष्ट्रीय राजनीति का अध्ययन करने के लिए विलायत जाने पर उन्होंने भी पद छोड़ दिया और कुछ दिन के लिए सियासत से अलग हो गए।
आज़ादी के बाद आचार्य कृपलानी ने 1951 में किसान मजदूर प्रजा पार्टी बनाई थी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रो. शिब्बन लाल सक्सेना इस पार्टी से जुड़े थे और वो फ़िराक़ गोरखपुरी के रिश्तेदार भी थे। उन्होंने इस पार्टी से फ़िराक़ साहब को चुनाव लड़ने के लिए मना लिया।
1951 के चुनाव में प्रो. शिब्बन लाल सक्सेना गोरखपुर उत्तर सीट से और फ़िराक़ गोरखपुरी गोरखपुर डिस्ट्रिक्ट साउथ से चुनाव लड़े। गोरखपुर साउथ से गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजय नाथ भी हिन्दू महासभा से चुनाव लड़े। चुनाव में फ़िराक़ गोरखपुरी ना केवल हारे बल्कि केवल 9586 वोट पाकर अपनी जमानत भी जब्त करवा बैठे। चुनाव में हार से फ़िराक़ गोरखपुरी बहुत ख़फ़ा हुए थे।
1974 में आकाशवाणी गोरखपुर के लिए फ़िराक़ गोरखपुरी का इंटरव्यू रिकॉर्ड करने वाले वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी रवीन्द्र श्रीवास्तव ने जब उनसे उनके चुनाव लड़ने के अनुभव के बारे में पूछा तो फ़िराक़ बोले- जहाँ लोग आदमी को 'मनई' और गर्दन को 'गटई' कहते हैं, वहाँ फ़िराक़ का क्या काम !'
इस चुनाव के बाद जब भी नेहरू उन्हें छेड़ने के लिए पूछते थे कि 'सहाय साहब कैसे हैं?' तो फ़िराक़ गोरखपुरी का जवाब होता था - 'सहाय कहां अब तो बस हाय रह गया है।'
- डॉ रूद्र  प्रताप दुबे,लखनऊ निवासी