एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

केदारनाथ दर्शन में होगी आसानी, टोकन से सीधे कपाट तक पहुंचेंगे शिवभक्त



देवभूमि उत्तराखण्ड के हिमालय में विराजने वाले भगवान केदारनाथ के दर्शनों के लिए इस बार शिवभक्तों को सर्दी और बारिश में लंबी-लंबी लाइन में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि इस बार यात्रियों को दर्शन के लिए टोकन दिए जाएंगे और अपनी बारी आने पर ही मंदिर परिसर में थोड़ा सा इंतजार करना पड़ेगा. उत्तराखंड के गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट खुलने से शुरू होते ही चार धाम यात्रा का शुरुआत हो होगी. 7 मई को इस बार यात्रा का शुभारम्भ गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट खुलने से होने जा रहा हैं. केदारनाथ धाम के कपाट 9 मई को और बद्रीनाथ धाम के दर्शन 10 मई से हो सकेंगे. 


उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी तट पर 3584 मीटर की ऊंचाई पर बसा केदारनाथ मंदिर भगवान शिव का बारहवां ज्योतिर्लिंग है. गंगोत्री धाम को मां गंगा का, तो यमनोत्री को यमुना नदी का मायका कहा जाता है. अलकनंदा नदी किनारे बसे बद्रीनाथ धाम को मोक्ष का धाम कहा जाता है. यहां भगवान श्री विष्णु योग मुद्रा में विराजमान हैं. सबसे ज्यादा तीर्थयात्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा के लिए आते हैं, लेकिन इन धामों में सबसे दुर्गम यात्रा केदारनाथ धाम की मानी जाती है.

आपको बता दें कि इस बार सर्दियों में हुई भारी बर्फबारी ने यात्रा की तैयारियों को कई बार बाधित किया. बर्फ के कारण खासतौर से केदारनाथ धाम में काफी नुकसान हुआ. इस कारण यहां रुकने के इंतजाम पर भी असर पड़ा है. इसलिए इस बार केदारनाथ धाम में एक समय में अधिकतम एक हजार श्रद्धालु ही रुक सकेंगे. धाम के पास ही बने एक पड़ाव पर पांच सौ यात्री ही रूक पाएंगे, जबकि गौरीकुंड में आठ हजार भक्तों इंतजाम होगा. केदारनाथ की यात्रा पर आने वाले भक्तों की निजी गाड़ियों को भी इस बार गौरीकुंड तक नहीं आने दिया जाएगा. इन वाहनों को 6 किलोमीटर पहले सोनप्रयाग में ही रोक दिया जाएगा. हर साल लगभग 25 लाख भक्त यहां चार धामों में दर्शनों के लिए आते हैं.

आपको एक महत्वपूर्ण जानकारी और दे दें कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस बार भी फोटोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन के लिए 36 सेंटर्स बनाए गए हैं. यात्रा की शुरुआत ऋषिकेश से होती है. इसलिए सबसे प्रमुख केंद्र यहां पर बनाया गया है. इसके अलावा हरिद्वार, दोबाटा, बड़कोट, फाटा, सोनप्रयाग, जोशीमठ, पांडुकेश्वर सहित कई अन्य स्थानों पर भी यात्री रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं.

 किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर प्रशासन को सटीक जानकारी मिल सकती है. मौसम खराब होने पर या कोई अन्य जानकारी पहुंचाने के लिए रजिस्टर किए गए नंबरों पर सूचनाएं भेजी जा सकती हैं. साल 2013 की भीषण आपदा के बाद इस व्यवस्था को बनाया गया. हर साल की तरह इस बार भी देश के कोने – कोने से बड़ी संख्या में शिवभक्तों के यहाँ आने की पूरी संभावना बनी हुवी है और शासन – प्रशासन ने भी अपने स्तर से पूरी मुस्तैदी के साथ तैयारियां की हैं.
-  चन्दन सिंह परिहार,बागनाथ न्यूज