उत्तराखंड के 21 लाख 20 हजार युवा चुनेंगे अपना सांसद हरिद्वार में सबसे ज्यादा तो रुद्रप्रयाग में हैं सबसे कम युवा.सत्राहवीं लोकसभा चुनाव में आज के युवा मतदाताओं का बढ़ता जोश अच्छे-अच्छों के होश उड़ा सकता है। इस बार के चुनाव में युवा मतदाताओं की बढ़ती सक्रियता और उनकी बदलती सोच निर्णायक साबित हो सकती है। सूबे की पांच लोकसभा सीटों पर हार-जीत में उनकी अहम भूमिका रहेगी। युवा हितों की पैरवी करने वाले राजनैतिक दलों ने चुनावी महासमर में युवाओं को उतारने में उदासीनता दिखाई हो लेकिन जिस तरह का जोश युवा मतदाताओं में देखने को मिल रहा है वह चुनावी नतीजों में अप्रत्याशित रूप से उलट पफेर कर सकता है।
उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 11 अप्रैल को वोटिंग होगी। सूबे की पांच लोकसभा सीटों, अल्मोड़ा- पिथौरागढ़, नैनीताल-ऊध्मसिंह नगर, हरिद्वार, पौड़ी और टिहरी का पफैसला राज्य के 77 लाख 17 हजार 125 मतदाता करेंगे। सूबे की पांचों सीटों पर युवा मतदाताओं का अहम रोल रहेगा। सूबे में 20 से 29 आयुवर्ग के मतदाताओं की कुल संख्या 21 लाख 20 हजार 218 है, जो कुल मतदाताओं का 27.54 प्रतिशत है। इसी वर्ग की चुनावों में सबसे अध्कि भागीदारी भी रहती है। युवाओं पर राजनैतिक दलों की भी नजर रहती है। इस बार हो रहे लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश की पाच सीटों पर सांसद चुनने के लिए 76 लाख 98 हजार 293 मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे।
यह संख्या बढ़ भी सकती है, क्योंकि अभी मतदाता सूची बनने का काम जारी है। यह आंकड़ा 31 जनवरी 2019 तक बनाई गई मतदाता सूची की है। इस पर नजर डालें तो युवा मतदाता के हाथ में ही जीत की कुंजी है। कुल मतदाताओं का 27 प्रतिशत वोटर यानी 21 लाख से ज्यादा मतदाता 20-29 आयु वर्ग के हैं। हरिद्वार संसदीय सीट में युवा मतदाताओं की संख्या सबसे अध्कि है। यहां पर इनकी संख्या 4 लाख 21 हजार 365 है। इसके बाद दूसरे नंबर नैनीताल जिले का ऊध्मसिंह नगर जिला है जहां पर युवा मतदाताओं की संख्या 3 लाख 78 हजार 519 है।
टिहरी संसदीय सीट के तहत आने वाला देहरादून तीसरे सबसे बड़ा युवा मतदाताओं वाला जिला है। यहां पर युवा मतदाताओं की संख्या 3 लाख 31 हजार 260 युवा मतदाता हैं। नैनीताल जिले में युवा मतदाताओं की संख्या 1 लाख 94 हजार 337 है। जाहिर सी बात है कि युवा वर्ग जिस प्रत्याशी के साथ खड़ा होगा उसकी जीत तय है। चुनाव में युवा मतदाताओं की भारी-भरकम हिस्सेदारी को देखते हुए ही सभी राजनीतिक पार्टियां उन्हें किसी न किसी तरह से लुभाने में जुटी हुई हैं। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस सभी की कोशिश है कि युवा मतदाता उनसे जुड़े।
उत्तराखंड की पांचों सीटों पर युवा मतदाता ही किसी भी पार्टी के प्रत्याशी को जिता-हरा कर उसकी किस्मत का पफैसला करेंगे। पहली-दूसरी बार वोट डालने वाले युवा मतदाताओं के हाथ में ही राजनीतिक पार्टियों की ताकत बढ़ाने-घटाने की शक्ति होगी। ऐसे में 17वीं लोकसभा की तकदीर लिखने में युवा मतदाताओं की अहम भूमिका रहने वाली है।
सैनिक परिवार भी हैं ‘गेमचेंजर’
उत्तराखंड एक सैन्य बाहुल्य प्रदेश है। सूबे के हर जिले में दूसरे परिवार से एक व्यक्ति सेना या पैरा मिलिट्री पफोर्सेज में सेवारत है। सूबे में इस समय सर्विस वोटरों की संख्या लगभग 1 लाख के आसपास है। इनकी संख्या भी घटती बढ़ती रही है। भारतीय सेना में उत्तराखंड से ही पौने दो लाख सैनिक अकेले उत्तराखंड से हैं। वहीं सूबे में पंजीकृत पूर्व सैनिकों और वीरनारियों की संख्या पर नजर डाली जाए तो इनकी संख्या 1.64 से ज्यादा है। ऐसे में पूर्व सैनिकों के परिवारों पर भी राजनेतिक दलों की नजर रहती है। इसके अलावा पेरा मिलिट्री पफोर्सेज में ही सूबे के 50 हजार से युवा तैनात हैं जबकि 35 हजार से ज्यादा संख्या सेवानिवृत्त (सैनिकों की है।
इस तरह से उत्तराखंड में सैनिक और पूर्व सैनिक परिवारों की संख्या 18 लाख से भी ज्यादा होने का अनुमान है। सैनिक परिवारों के ‘गेमचेंजर’ की भूमिका को देखते हुए ही राजनैतिक दलों की नजर भी इन पर रहती है। हर राजनैतिक दल सैनिकों से जुड़े मुद्दों को भी उठाते रहे हैं, लेकिन सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवारों का मूड भांपना राजनैतिक दलों के लिए टेढ़ी खीर से कम नहीं है। वैसे अब तक जितने भी चुनाव हुए हैं सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवारों ने केंद्रीय मुद्दों को ही आधर बनाकर वोटिंग की है। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी ऐसा ही होने का अंदाजा लगाया जा रहा है।
किस जिले में कितने हैं युवा मतदाता
उत्तरकाशी - 70217
चमोली - 78806
रुद्रप्रयाग - 49369
टिहरी - 130552
देहरादून - 331260
हरिद्वार - 421365
पिथौरागढ़ - 94230
बागेश्वर - 50675
अल्मोड़ा - 128320
चंपावत - 53196
नैनीताल - 194337
ऊधमसिंह नगर - 378519
कुल - 2120218