एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

केदारनाथ को भीषण खतरा - 3



आकाश भी बनाता है केदारनाथ का सन्तुलन. केदारखण्ड के 41 वें व 42 वें अध्याय में केदारतीर्थ का विस्तृत वर्णन है। पुर्ननिर्माण करने वालों को इसका भी अध्ययन करना चाहिये था।

41 वें अध्याय के पहले तीन श्लोक में पार्वती शिव से केदारतीर्थ के बारे में विस्तारपूर्वक बताने का अनुरोध करती है।

‘‘कथयस्य महादेव विस्तरान्मम क्षेत्रकम्।
केदार नाम यत्प्रोक्तं स्वर्गमोक्षप्रदायकम्।।’’ 
अर्थात्, महादेव केदारतीर्थ के विस्तार के बारे बताइये,।
इस पर शिव इस तीर्थ का जो रेखाचित्र खींचते हैं, उसे आज भी ध्यान में रखा जाना चाहिये। इसमें सम्पूर्ण धाम के भूगोल का वर्णन है। धाम में अन्य तीर्थों का अस्तित्व भी है। यम भी सन्तुलन बनाते हैं। ये तीर्थ हिरण्यगर्भ तीर्थ, वहिृतीर्थ, ब्राह्मतीर्थ आदि हैं।
धाम में शिव के अलावा अन्य देवता भी रहते हैं, जिनमें भैरव और कार्तिकेय भी हैं। मधुगंगा जहां पर मंदाकिनी से मिलती है, वह कार्तिकेय का स्थान है। और क्षीर गंगा जहां मंदाकिनी से मिलती है, वह ब्राह्म तीर्थ है। इस तरह से नदी तंत्र को भी समझाया गया है। मंदिर की सुरक्षा के लिये दीवारबन्दी, कहीं नदी तंत्र को भी न तोड़े दे।
शिव ने स्वयं इसे धाम कहा है - श्लोक 22 में कहा गया है कि ‘‘सप्तप्रकारसंयूक्तम् मम धाम महेश्वरि’’
केदार धाम के कुण्डों की स्थिति व दिशा इस तरह से जानी जाती है - हंसक कुण्ड उत्तर पूर्व, रेतस कुण्ड दक्षिण दिशा, मंदिर के पीछे की ओर अमृत कुण्ड, सुबलक कुण्ड पश्चिम दिशा और उदक कुण्ड मंदिर के सामने।
यह भी ध्यान रहे, आकाश भी इस धाम का सन्तुलन बनाता है। जिसे हैलीकाप्टर खण्डित करते हैं। ये न भूलें कि 2013 की आपदा का सम्बन्ध आकाश के असन्तुलन से भी था। पश्चिमी विक्षोभ और पूर्वी मानसून की भिडन्त इस धाम के आकाश में ही क्यों हुई।
पहला सवाल तो यही उठता है कि इतने संवेदनशील धाम में विशाल हैलीपैड का निर्माण और निरन्तर हैलीकाप्टरों का उड़ना-बैठना कितना ठीक है। मशीनों से खुदाई, पत्थरों का जमावड़ा, विशाल दीवारें और कालोलीनुमा आवास निर्माण। पिछली चार सर्दियों में वर्फवारी के दौरान भी निर्माण होता रहा है। विशेषज्ञ बता रहे हें कि 2013 में जिस चोराबाड़ी ताल के पानी ने भारी तबाही मचाई थी, उससे अब कोई खतरा नहीं है। लेकिन भारी निर्माण से पैदा हुये असन्तुलन से ये शिव धाम भूजल के ताल में नहीं समा जायेगा अर्थात दलदली भूमि में नहीं धंसेगा क्या इस पर भी विशेषज्ञ कुछ बता पायेंगे।
आखिरी क़िस्त .
- महिपाल नेगी,स्वतंत्र पत्रकार 
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