ये सूचना क्रांति का ही नहीं सूचना भ्रांति का भी दौर है. साधन संपन्न लोग अपने तंत्र के बूते जितनी चाहे उतनी गलत जानकारियां लोगों तक पहुंचा सकते हैं. सब जानते हैं कि इस देश में सरकार से ज़्यादा साधन संपन्न भला और कौन होगा.
24 सितंबर 2018 को सिक्किम के पाक्योंग में खुद पीएम मोदी ने कैमरों के सामने कहा था कि सिक्किम हवाई अड्डे के साथ अब देश में 100 हवाई अड्डों का परिचालन होने लगा है. उनके दावे का सच खुद डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन (DGCA) ने दिया है. 28 नवंबर 2018 को आरटीआई के जवाब में बताया गया कि देशभर में 100 नहीं बल्कि सिर्फ 80 हवाई अड्डों को लाइसेंस मिला हुआ है.
मोदी जी ने सिक्किम की जनसभा में सिर्फ एक ही दावा नहीं किया था. उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार के आने से पहले अप्रैल 2014 तक बस 65 हवाई अड्डों को लाइसेंस मिला हुआ था पर ना जाने कैसे उन तक गलत जानकारी पहुंची या उन्होंने गलत जानकारी दी क्योंकि ये संख्या भी 68 थी.
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछली सरकार से भी तुलना की थी. कहा था कि 67 सालों में एक हवाई अड्डा प्रति साल की दर से काम हुआ जबकि उनके काल में हर साल 9 हवाई अड्डे बने. दरअसल वो समझाना चाह रहे थे कि 4 साल में उनकी सरकार ने 35 हवाई अड्डे तैयार कर दिए. डीजीसीए ने एक आरटीआई के जवाब में इस दावे का भी पोल खोल किया. 17 दिसंबर 2018 को दिए गए जवाब में बताया गया कि साढ़े चार साल में सिर्फ 4 निजी हवाई अड्डे बने. सरकार की पहल पर कुल 8 ही हवाई अड्डे बने हैं.
इसके अलावा एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया बताती है कि 2014 में 73 हवाई अड्डे परिचालन में थे जिनकी तादाद 2018 में 89 हो गई. कुल 16 हवाई अड्डे ही मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में बढ़ाए. आईजोल का हवाई अड्डा 2014 में इस सूची का हिस्सा था लेकिन 2018 में नहीं. जलगांव, झारसुगुड़ा, कोल्हापुर, पासीघाट, पठानकोट और तेजपुर में तो पिछले साल यानि 2018 दिसंबर तक व्यवसायिक उड़ानें शुरू भी नहीं हुई थीं. डीजीसीए ने बताया गया है कि इन हवाई अड्डों पर उड़ान के आरंभ पर उनके पास कोई जानकारी नहीं है.
विकास के दावों से जुड़ी अंतिम जानकारी और लेते जाइए. सितंबर 2015 में प्रधानमंत्री ने सिंगापुर यात्रा के दौरान जयपुर और अहमदाबाद एयरपोर्ट के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और सिंगापुर की दो संस्थाओं के बीच एमओयू साइन हुआ था. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया बताती है कि अब तक जयपुर और अहमदाबाद हवाई अड्डों के लिए सिंगापुर से किसी भी तरह की हवाई सेवा और हवाई अड्डा प्रबंधन की सुविधा मिलनी शुरू नहीं हुई है. इस समझौते को लागू क्यों नहीं किया जा सका इसे कोई नहीं जानता.
कुल मिलाकर बात इतनी है कि ना तो सरकारी संस्थाएं मोदी के इस दावे की पुष्टि करती हैं कि हमारे पास 100 हवाई अड्डे परिचालन में हैं और ना ही मोदी सरकार के कार्यकाल में 36 हवाई अड्डे बनाए जाने को ही सच बताती हैं. प्रधानमंत्री ने लोगों को भ्रामक जानकारियां प्रदान कीं और मीडिया में वो आज तक घूमते हुए उनके विकास का प्रचार कर रही हैं.
नितिन ठाकुर,पत्रकार,आजतक (Associate Senior Producer)