एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

वह इंसान जिसने भारत को विश्वविजेता बनाया



कपिल देव… वह इंसान जिसने भारत को विश्वविजेता बनाया। वह इंसान जिसकी मिसालें कई पीढ़ियों से दी जा रही हैं और आने वाली कई पीढ़ियों तक दी जाएंगी। उस इंसान का रुतबा ही ऐसा है कि भारत का कोई भी क्रिकेटप्रेमी उससे नफरत नहीं करता।
हर भारतीय के दिल में बसने वाले कपिल देव से मोहब्बत करने वाले एक युवा ने अपनी भावनाएं उन्हें लिखने का फैसला किया। उस युवा की चिट्ठी हमारे पास है जिसे हम आप लोगों के जरिए कपिल देव तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।
कपिल सर,
मैं आपको नहीं जानता। मेरा जन्म आपके हाथ में वर्ल्ड कप की ट्रॉफी आने के बहुत बाद में हुआ है। पर मैं जानता हूं इस देश में क्रिकेट को बस एक खेल से धर्म आपने बनाया है। 1983 का वर्ल्ड कप उठाने से पहले आपने किन-किन परेशानियों का सामना किया होगा मैं बस इसका अंदाजा ही लगा सकता हूं।
सभी को पता है कि जब आप दुनिया जीतकर लौटे तब आपको और आपके साथियों को सम्मानित करने के लिए BCCI के पास पैसे नहीं थे। फिर स्वरकोकिला लता मंगेशकर ने आपके लिए दिल्ली में शो किया था। उस शो से इकट्ठा हुई रकम से आप लोगों को सम्मानित किया गया था। इतने कम संसाधनों में आपने जिस मेहनत और लगन से एक कप्तान के रूप में आगे बढ़कर टीम की अगुवाई की उसका कोई जवाब नहीं।
रिटायरमेंट के वक्त आपके नाम टेस्ट में 434 विकेट और 5000 से ज्यादा रन थे। आपके बाद हमें आपके जैसा पेसर नहीं मिला। आपकी रिटायरमेंट के बाद ‘ऑलराउंडर’ शब्द हम लगभग भूल ही गए। कई लोग आए और गए लेकिन अब तक ना तो कोई आपके जैसा आ पाया है और ना ही आगे भविष्य में ऐसी कोई संभावना दिख रही है।’
साल 2000 का वो बुरा दौर
मैंने देखा तो नहीं, लेकिन पढ़ा जरूरी है कि 1983 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ 17 रन पर ही हमारे पांच विकेट गिर गए थे। इसके बाद आपने इस मैच में 175 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी जो उस वक्त वर्ल्ड कप की हाईएस्ट इनिंग्स थी।
1999 में आपको भारतीय क्रिकेट टीम के कोच का पद सौंपा गया था लेकिन अगले ही साल, 2000 में आपने ये पद छोड़ दिया। वजह बनी मैच फिक्सिंग। ऐसे आरोपों से घिरे हुए अपने हीरो को मैंने नेशनल टीवी पर रोते हुए देखा है। लोग आपको देशद्रोही कह रहे थे लेकिन मुझे एक बार भी इस बात पर भरोसा नहीं हुआ।
इसके बाद आप जिस तरह उठे, इन परिस्थितियों का आपने जैसे सामना किया, वो सब शानदार था। अभाव में कैसे बेहतर करें, ये मैंने आपसे ही सीखा है। विकट परिस्थितियों में डटे रहना, उनसे लड़कर जीतना सिखाने के लिए शुक्रिया कपिल।
- आदर्श कुमार,युवा खेल पत्रकार