एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

राजनाथः भूल-चूक लेनी-देनी


नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में जैसे ही अमित शाह का नाम आया, मैंने तत्काल कहा था कि अब अमित भाई उप-प्रधानमंत्री की हैसियत वाले हो जाएंगे। वे राजनाथसिंह की जगह नं. 2 बन जाएंगे। कल वही हुआ। सरकार ने मंत्रिमंडल की जिन आठ कमेटियों की घोषणा की, उन सबकी सब में अमित शाह का पहला नाम था लेकिन राजनाथसिंह का नाम सिर्फ दो कमेटियों में था। एक सुरक्षा की और दूसरी आर्थिक मामलों की। जो दो सबसे महत्वपूर्ण कमेटियां मानी जाती हैं याने राजनीतिक मामलों और संसदीय मामलों की, उनमें राजनाथसिंह का नाम गायब था।
 इसका एक अर्थ यह भी हुआ कि प्रधानमंत्री की गैर-हाजिरी में इन कमेटियों की अध्यक्षता राजनाथ नहीं, अमित शाह करेंगे याने अब यह नहीं कहा जा सकता था कि राजनाथ का नंबर दूसरा है या तीसरा है या उससे भी नीचे है। इस खबर के आते ही यह अफवाह भी फैलने लगी कि राजनाथ नाराज हो गए हैं और वे इस्तीफे की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन मोदी ने काफी समझदारी दिखाई। इसके पहले कि यह मामला तूल पकड़ता, सरकार ने घोषणा कर दी कि राजनाथसिंह को दो नहीं, अन्य चार कमेटियों में भी शामिल कर लिया गया है। भूल-चूक लेनी-देनी।

लेकिन अभी भी यह सवाल बना हुआ है कि प्रधानमंत्री के बाद इन कमेटियों की अध्यक्षता कौन करेगा ? यह संतोष का विषय है कि जैसे ही किसी असंतोष के भड़कने की संभावना दिखाई पड़ती है, यह सरकार तुरंत सुधार कर लेती है, जैसे कि उसने हिंदी के प्रश्न पर तमिलनाडु के आगे तत्काल घुटने टेक दिए। यों तो किसी मंत्री की हैसियत सरकार में क्या होगी, यह तय करना प्रधानमंत्री के हाथ में ही होता है लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथसिंह के साथ जो कुछ हुआ है, वह यह डर पैदा करता है कि यह सरकार कहीं ‘भाई-भाई प्रायवेट लिमिटेड कंपनी’ न बन जाए।
 अभी तो मोदी की अप्रत्याशित विजय के कारण भाजपा के विरोधियो की भी बोलती बंद है लेकिन सरकार का यही ढर्रा बना रहा तो इसकी तीव्र प्रतिक्रिया बाहर और अंदर दोनों जगह होगी। देश की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। भाषणों और नारों से लोगों का पेट नहीं भरेगा। यदि भाजपा और सरकार में आंतरिक समरसता नहीं होगी तो पांच साल चैन से निकालना मुश्किल हो जाएंगे।
साभार डॉ. वेदप्रताप वैदिक