एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

पाकिस्तानी जीत पर भारी पड़ी वाल्श की खेल भावना






खेल में कभी ऐसा क्षण आता है जब खिलाड़ी के सामने दो विकल्प होते हैं, महान परंपराओं का आदर करें अथवा नियम के हिसाब से चलें जिससे जीत तो हासिल होगी, लेकिन इतिहास में ये ज़रूर लिखा जाएगा, ये एक्शन नियमानुसार तो सही था मगर उन परंपराओं के विरुद्ध जिसके लिए क्रिकेट जाना जाता है। उस दिन कोर्टने वाल्श ने वही किया जिसके लिए उन्हें आज लगभग 32 साल बाद भी याद किया जा रहा है। 
वो 16 अक्टूबर 1987 के दिन था, स्थान लाहोर का गद्दाफ़ी स्टेडियम। मौका था रिलायंस वर्ल्ड कप 1987 के सेमी-फ़ाइनल में जगह बनाने के लिए पाकिस्तान और वेस्ट इंडीज़ के बीच क्रूशियल मुक़ाबले का। इंडीज़ को जीत की ज़्यादा ज़रूरत थी। पाकिस्तान की चार जीत की तुलना में उसके खाते में अभी तक तीन जीत ही थीं। कैप्टेन विवियन रिचर्ड्स ने टॉस जीत कर पहले बैटिंग का फ़ैसला किया, मगर कैप्टेन इमरान ख़ान और वसीम अकरम की घातक गेंदबाज़ी के सामने इंडीज़ की शक्तिशाली टीम ने तीन गेंद बाकी रहते हुए 216 रन पर घुटने टेक दिए। 
पाकिस्तान के हौंसले बुलंद थे। होम पिच और होम क्राउड। मगर क्रिकेट में सब कुछ आशा के अनुकूल नहीं होता है। देखते ही देखते पाकिस्तान के 5 विकेट 110 पर गिर गए। ऐसे में विकेट कीपर-बैट्समैन सलीम युसूफ और इमरान ख़ान ने मोर्चा संभाला। मगर आख़िरी ओवर तक पहुंचते-पहुंचते पाकिस्तान की हालत खस्ता हो गयी यानी 214 रन पर 9 विकेट और जीत के लिए 14 रन की ज़रूरत। क्रीज़ पर अब्दुल क़ादिर और बैटिंग में कमज़ोर कड़ी सलीम जाफ़र। 
गेंद भरोसेमंद फ़ास्ट बॉलर कोर्टने वाल्श के हाथ में थी। वाल्श की पहली गेंद पर क़ादिर ने एक रन लिया। दूसरी गेंद पर जाफ़र ने एक रन लिया। अब 4 गेंद पर 12 रन। हालात ज़्यादा संगीन हो गए। तीसरी गेंद पर क़ादिर एक रन के लिए दौड़े। फिर जैसे ही वाल्श ने गेंद बटोरने में मिस-फील्ड की दूसरा रन भी ले लिया। अब 3 गेंद 10 रन। मगर हालात जस के तस संगीन। वाल्श की चौथी गेंद। मैच में विकेट-विहीन रहे क़ादिर ने लांग ऑफ पर छक्का लगा उड़ा दिया। पब्लिक पागल हो गयी। अब 2 गेंद चार रन। पाकिस्तान के पक्ष में अब कुछ-कुछ आसान दिखने लगा। पांचवीं गेंद पर छक्का लगाने से जोश में भरे क़ादिर ने दो रन ले लिए। 
अब आखिरी गेंद और 2 रन की ज़रूरत। यहाँ ज़बरदस्त ड्रामा हुआ जिसकी कभी अपेक्षा नहीं थी। वाल्श ने पॉपिंग क्रीज़ पार की। इधर संभावित जीत के जोश में नॉन-स्ट्राइकर जाफ़र आगे निकल गए। वाल्श रुक गए। उन्होंने लगभग आधी पिच क्रॉस कर गए जाफ़र को देखा। वो चाहते तो जाफ़र को 'मांकडेड' रन आउट कर सकते थे। मगर उन्होंने ऐसा न करके खेल भावना का परिचय देते हुए जाफ़र को क्रीज़ में लौटने का मौका दिया। चारों ओर हाहाकार मच गया। इंडीज़ के सभी खिलाड़ियों ने वाल्श के इस एक्शन पर सवालिया नज़रें उठायीं। 

लेकिन शांत चित्त वाल्श पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने आख़िरी गेंद डाली। क़ादिर की हिट सर्किल के भीतर खड़े फील्डर के बगल से गुज़री। जब तक वो पीछा करके गेंद पकड़ता दो रन पूरे हो गए। पाकिस्तान की 1 विकेट से रोमांचक जीत। मगर चारों ओर चर्चा वाल्श की खेल भावना की रही। कुछ ने वाल्श की आलोचना भी की, अगर वो जाफ़र को मांकडेड कर देते तो इंडीज़ टूर्नामेंट से बाहर न होकर यक़ीनन सेमी-फ़ाइनल में होती और शायद वर्ल्ड कप भी उठाती। बहरहाल, बाद में राष्ट्रपति जिया-उल-हक़ ने वाल्श की खेल भावना पर मोहर लगाते एक शानदार कालीन उपहार में दिया। 
- वीर विनोद छाबड़ा