कभी-कभी ऐसा होता है कि मैच का नतीजा कुछ भी निकले मगर एक-आध घटना ऐसी हो जाती है जो लंबे अरसे तक छाई रहती है। एडबस्टन में 7 अगस्त 2005 को यही हुआ था।
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच 'एशेज' हथियाने के लिए दूसरे टेस्ट का चौथा दिन। ऑस्ट्रेलिया लॉर्ड्स टेस्ट 239 रन से जीत कर सीरीज़ में 1-0 से आगे थी। मगर आज इंग्लैंड की बारी थी हिसाब बराबर करने की। ऑस्ट्रेलिया को 282 रन का लक्ष्य मिला था जीतने का। तीसरे दिन का खेल ख़त्म होने तक उसके 175 रन पर 8 विकेट गिर चुके थे। मैच उसी दिन ख़त्म हो जाता। आधा घंटा एक्स्ट्रा भी दिया गया। मगर शेन वार्न अड़ गए। लिहाज़ा मैच चौथे दिन में चला गया।
ऐसा लगा, आज महज़ रस्म अदायगी ही होनी है। मगर वार्न और ब्रेट ली ने खूंटा गाड़ दिया, इतनी आसानी से मैच हाथ से नहीं जाने देंगे। एक-एक करके रन बनने शुरू हुए। इधर इंग्लिश बॉलर्स के पसीने छूट गए, हाथ में आई जीत मानों हाथ से छिन रही हो। मगर एंड्रयू फ़्लिंटॉफ़ पूरे फॉर्म पर थे। अब तक मैच में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। और अंततः उन्होंने ही इंग्लैंड को राहत दी जब वार्न (42) हिट विकेट हो गए। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर हुआ 220 रन पर 9 विकेट।
ऑस्ट्रेलिया के लिए मंज़िल बहुत दूर हो गयी। बैट से ज़्यादा दोस्ती नहीं रखने वाले कास्प्रोविच ब्रेट ली का साथ देने क्रीज़ पर आये। आम धारणा थी कि ऑस्ट्रेलिया की हार में बस अब एक या दो ओवर की बात बाकी है। मगर ली और कास्प्रोविच तो मानो जान देने पर तुल गए। रन चुराने का कोई मौका नहीं चूक रहे थे। इंच-इंच कर जीत की ओर बढ़ने लगे। तभी साइमन जोंस ने एक गलती कर दी। कास्प्रोविच का कैच छोड़ दिया। तब ऑस्ट्रेलिया जीत से 15 रन पीछे था।
अब आया वो ओवर जिसमें कुछ भी हो सकता था। ऑस्ट्रेलिया और जीत के बीच सिर्फ़ पांच रन का फ़ासला। गेंद स्टीव हरमिसन के हाथ में थी। पहली गेंद पर एक रन लिया। दूसरी गेंद पर भी एक रन। सामने आ गए कमज़ोर कड़ी कास्प्रोविच। अब तक दसवें विकेट के लिए 59 रन जुड़ चुके थे। ऑस्ट्रेलिया जीत से 3 रन दूर। हरमिसन की तीसरी गेंद लेग स्टंप पर यार्कर थी, जिसे लेग पर ठेलने के प्रयास में कास्प्रोविच (17) विकेट कीपर गेरिअंट जोंस को डाइविंग कैच दे बैठे। इंग्लैंड की 2 रन से अविश्वसनीय जीत और ऑस्ट्रेलिया की हार। चारों तरफ जीत का उन्माद।
मगर ब्रेट ली (43 नॉट आउट) बेहद उदास थे। वो घुटनों के बल बैठ गए, इतने करीब आकर हार गए। और ऐसे में सबसे पहले एंड्रयू फ़्लिंटॉफ़ ने वही किया जो उनको उनके पिता ने बचपन सिखाया था, खेल के मैदान में जीत की ख़ुशी मनाने से पहले आहत विपक्ष के ज़ख्मों पर मरहम लगाओ। और फ़्लिंटॉफ़ ने ब्रेट ली के कंधे पर हाथ रख कर सांत्वना दी, मित्र अभी तो हम एक-एक की बराबरी पर हैं। तीन टेस्ट बाकी हैं। हौंसला बुलंद रखो।
अंततः ये सीरीज़ इंग्लैंड ने 2-1 से जीती थी, मगर पूरी सीरीज़ पर क्रिकेट प्रेमियों के दिलो-दिमाग पर एंड्रयू फ़्लिंटॉफ़ की ब्रेट ली को सांत्वना देने वाली तस्वीर छायी रही।