क्रिकेट में आजकल सबसे अधिक चर्चा हो रही महेंद्र सिंह धोनी को लेकर, वो रिटायरमेंट क्यों नहीं ले रहे हैं? वास्तव में ये चर्चा तो उसी दिन से शुरू हो गयी थी जब पिछली सर्दियों में टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के ट्विन दौरे पर गयी थी। धोनी को शामिल किये जाने पर सिलेक्टर्स को जम कर लथाड़ा गया, 37 प्लस साल के विकेट कीपर बैट्समैन धोनी अब अपने प्राईम की छाया भर हैं। विकेट पर जमने में ज़रूरत से ज़्यादा टाइम लेते हैं। एक-आध इनिंग अच्छी खेल गए तो इसका मतलब ये नहीं कि बाकी मैचों में उनकी विफलताओं को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए।
वो अच्छे फिनिशर नहीं रहे। बतौर विकेटकीपर भी उनके रिफ्लेक्शंस धीमे हैं। जब इस उम्र के बाकी लोग रिटायर हो गए, तो धोनी क्यों नहीं? मगर सिलेक्टर्स आंखें बंद किये रहे, कानों में रुई ठूंसे रहे, होंठों पर टेप चिपकाए रहे। तभी साफ़ हो गया था कि वर्ल्ड कप के लिए भी धोनी चुने जाएंगे। वर्ल्ड कप के बीच में ऋषभ को चोटिल शिखर से रिप्लेस किया गया। उन्हें चार नंबर पर खिलाया गया जबकि यहां धोनी जैसे तजुर्बेकार की ज़्यादा ज़रूरत होती है। उनका मिजाज़ इस पोज़िशन को सूट करता था।

न्यूज़ीलैंड के विरुद्ध सेमी-फ़ाइनल में अगर 5/3 के स्कोर पर ऋषभ की जगह धोनी होते तो स्थिति शायद अलग होती। वो बाद में आने वाले बैट्समैन को बेहतर गाइड करते जैसा कि उन्होंने रविंद्र जडेजा को किया। 18 रन से हारे इस मैच में धोनी ने 72 गेंद पर 50 रन बनाये और वो बहुत क्रूशियल मौके पर दूसरा रन लेने के प्रयास में रन आउट हो गए। हार का सारा ठींकरा धोनी के सर फोड़ दिया गया। धोनी ने खुद को प्रोमोट क्यों नहीं किया? अगर उनके जैसा सबसे सीनियर खिलाड़ी चाहता तो कप्तान और कोच की क्या मज़ाल थी कि इंकार कर देता। मगर सच्चाई कोई नहीं जानता। न धोनी से किसी ने पूछा और न कप्तान और कोच ने कोई सफाई दी। सब कयास लगा रहे हैं।
उस मैच में धोनी का स्ट्राइक रेट 69.44 था और उनसे ज़्यादा सिर्फ जडेजा और पांड्या का रहा। बाकी बैट्समैन जिस लापरवाही से आउट हुए, धोनी के पीछे हाथ धोकर पड़े किसी आलोचक ने टिप्पणी करने की ज़हमत नहीं उठाई। वर्ल्ड कप की आठ इनिंग में धोनी ने 273 रन बनाये जो मिडिल आर्डर के सब बैट्समैन से ज़्यादा है। यों भी पुरानी रीत है, जब तक जीतते रहे, सब बल्ले-बल्ले और अगर हार गए तो कमियां के सिवा कुछ नज़र नहीं आता।
अब कोई बताये कि धोनी की क्या गलती है? अगर सिलेक्टर्स उन्हें न चुनते तो धोनी उनका क्या बिगाड़ लेते? यों होना ये चाहिए था कि धोनी को खुद ही मना कर देना चाहिए था, किसी नए को चांस दें। मगर उन्होंने मना नहीं किया, शायद इसलिए कि बहुत देर हो चुकी थी। वर्ल्ड कप जैसे अहम टूर्नामेंट की तैयारी तो ढाई-तीन साल पहले शुरू हो जाती है। इंग्लैंड वालों ने तो चार साल पहले शुरू कर दी थी। मगर इंडियन सिलेक्टर्स सोते रहे। उन्हें 2015 के वर्ल्ड कप ख़त्म होते ही साफ़ कर देना चाहिए था कि 2019 में उम्रदराज़ों की कोई जगह नहीं होगी।
अब सवाल रहा, धोनी रिटायरमेंट का एलान क्यों नहीं करते? इसका जवाब यही है कि हर खिलाड़ी को अधिकार है कि अपने विवेक के अनुसार अपने रिटायरमेंट का समय चुने। धोनी की निगाहें अगले साल के आईपीएल पर हैं। इसलिए वो रिटायर नहीं हो रहे हैं। हां उन्होंने बीसीसीआई को सूचित कर दिया है कि वो वेस्ट इंडीज़ के टूर के लिए वो उपलब्ध नहीं हैं। अब इस पर किसी को दिक्कत तो नहीं होनी चाहिए।
- वीर विनोद छाबड़ा,सिनेमा और खेल जगत के दिग्गज पत्रकार