एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

इमरान पर भरोसा क्यों करें या नहीं ?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कमाल कर दिया। उन्होंने अमेरिका में अपने आतंकवादियों के बारे में ऐसी बात कह दी, जो आज तक किसी भी पाकिस्तानी नेता ने कहने की हिम्मत नहीं की। उन्होंने अमेरिका के एक ‘शांति संस्थान’ में भाषण देते हुए कह दिया कि पाकिस्तान में 30 हजार से 40 हजार तक सशस्त्र आतंकवादी सक्रिय हैं।
  अफगानिस्तान और कश्मीर में खूंरेजी करते रहे हैं। ऐसे 40 गिरोह पाकिस्तान में दनदना रहे हैं। उनके खिलाफ 2014 से कार्रवाई शुरु हुई, जब उन्होंने पेशावर के फौजी स्कूल के डेढ़ सौ बच्चों को मार डाला था। इमरान ने दावा किया कि उनकी सरकार ने सत्ता में आते ही इन दहशतगर्द गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरु कर दी है।

उनकी सक्रियता को पिछली पाकिस्तानी सरकारें छिपाती रही हैं और उनके बारे में झूठ बोलती रही हैं। ये आतंकवादी
 हाफिज सईद इस समय गिरफ्तार है और उसकी जमात-उद-दावा के 300 मदरसे, स्कूल, अस्पताल, प्रकाशन संस्थान और एंबुलेंसों को सरकार ने जब्त कर लिया है। इमरान के इस तेवर से पाकिस्तान के कई राजनीतिक दल, टीवी चैनलों के एंकर और देशभक्त पत्रकार लोग बेहद खफा हैं लेकिन वे यह क्यों नहीं समझते कि इमरान की इस साफगोई का जबर्दस्त फायदा पाकिस्तान को मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय वितीय टास्क फोर्स अक्तूबर में पाकिस्तान को काली सूची में डालनेवाली है।

क्या वह रहम नहीं खाएगी ? इसके अलावा अमेरिकी नीति-निर्माताओं पर इमरान की इस स्वीकारोक्ति का क्या कोई असर नहीं पड़ेगा ? इमरान ने तालिबान और काबुल सरकार के बीच भी समझौता करवाने का संकल्प प्रकट किया है। पाकिस्तान के विरोधी नेता इस नए तेवर को इमरान का ढोंग बता रहे हैं, उनका शीर्षासन कह रहे हैं, वे उन्हें फौज का चमचा बताते रहे हैं लेकिन मैं सोचता हूं कि इस नये इमरान का जन्म पाकिस्तान की मजबूरी में से हुआ है।
यह मजबूरी तात्कालिक हो सकती है लेकिन यह है, सच ! भारत के लिए इस सच को स्वीकारना काफी मुश्किल है। दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीता है लेकिन मैं सोचता हूं कि भारत अपनी सुरक्षा के बारे में पूरी सावधानी रखे लेकिन इमरान पर भरोसा भी क्यों न करे ? 
डॉ. वेदप्रताप वैदिक