एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

राम झूला पुल ( शिवा नंद पुल ) को पर्वतीय विकास मंत्री श्री चन्द्र मोहन सिंह नेगी ने बनवाया

राम झूला पुल ( शिवा नंद पुल ) को पर्वतीय विकास मंत्री श्री चन्द्र मोहन सिंह नेगी ने बनवाया था.लक्ष्मण झूला पुल 90 साल की उम्र का हो गया है। सरकार ने उस पर पाबंदी लगा दी है कि कोई दुर्घटना न हो, ऐसे में उससे 2 किलोमीटर पहले राम झूला पुल का ऐतिहासिक स्वरुप जानना जरूरी हो जाता है। राम झूले पुल पर हल्के से कोई बार त्योहार पर एक से डेढ़ लाख आदमी चलते हैं। इसे पैदल का नई दिल्ही की मेट्रो भी कह सकते हैं।

 लक्ष्मण झूला पुल में 80 के दशक में दबाब था, नए पुल की मांग होने लगी थीं। धनारी पट्टी उत्तरकाशी से 1975 में आये स्वर्ग आश्रम श्री नारायण सिंह रावत, वह इस इलाके के लिए चमकाने के लिए जी जान से जुट गए। झूला पुल के लिए नारायण सिंह  1983 में धरने पर बैठ गए थे। 11 वें दिन उनके धरने को तुड़वाने पर्वतीय विकास मंत्री श्री चंद्र मोहन सिंह नेगी स्वर्गआश्रम पहुँचे। रावत जी ने नेगी जी के सामने बोला कि ,आप गंगा जल सिर पर रख कर लेकर सौगन्ध खाओ कि पुल बनाओगे। मंत्री ने वैसे ही किया। और वहीं पर स्वीकृति दे दी। तब नेटताओ की जुबान जुबान होती थी। उन्होंने घोषणा की यहाँ पर झूला पुल बनेगा। बना। 
कागजो में यह शिवा नंद पुल है , लेकिन इसे आम भाषा मे राम झूला पुल कहते हैं। क्योंकि लक्ष्मण झूला पुल दो किमी दूरी पर है। राम लक्ष्मण बोलने में लोगों को सहूलियत हो जायेगी। लख़नऊ जाकर उन्होंने इस पर काम किया। एक डेवलपमेंट यह हुआ कि, श्री चंद्र मोहन सिंह नेगी का विभाग बदल कर पर्यटन कर दिया गया। लेकिन वे इस मांग को लेकर ईमानदारी से लगे रहे। उनके पर्वतीय विकास मंत्री यह स्वीकार हो गया था। उन्होंने श्री मुलायम सिंह यादव जो विपक्ष के नेता थे उनका साथ लिया। इसको मंजिल तक पहुंचा दिया।

इस पुल के लिए, 1986 में यह उत्तर प्रदेश पीडब्लू डी ने 97 लाख स्वीकृत किया। इसको श्री महिमानंद ,श्री चैत राम कुड़ियाल, श्री शूरवीर सिंह पंवार ने जो ए क्लास कॉन्टेक्ट्स थे ने बनवाया टिहरी जिले के नरेंद्रनगर लोक निर्माण विभाग डिवीजन ने इसकी मॉनिटरिंग की। तब स्वर्ग आश्रम में उंगलीयों पर गिने जाने वाली दुकानें थीं। जो सिर्फ अप्रैल, मई, जून (जुलाई आधा )में चलती थी। क्योंकि यहाँ से लक्ष्मण झूला पुल था। वो भी 2 किलोमीटर दूर। 3 महीने का सीजन था स्वर्ग आश्रम का। बहुत कष्ट थे। बर्षात में गंगा के रूप विकराल होने पर काफी लोग उस पार के पढ़ाई करना छोड़ चुके थे।

यह तो तय हो गया था कि, पुल तो राम झूला बनेगा, लेकिन उस पार बिलड़ा जी की जमीन थीं। जो उन्होंने अपने दादा बसंत कुमार बिलड़ा के नाम रखी थीं। उन्ही के नाम पार्क है। उनकी मूर्ति भी है। पोते का नाम था बसन्त कुमार बिलड़ा, बसन्त के पिता घनश्याम दास बिलड़ा थे। बसन्त जी अब चले गए हैं अनन्त यात्रा में। उनकी बेटी मंजू श्री खेतान अब स्वर्ग आश्रम ट्रस्ट चलाती हैं। बिलड़ा परिवार बड़ा धार्मिक था। बसन्त कुमार बिलड़ा ने स्थानीय लोगों की मांग पर उस पार की जमीन दे दी थीं कि यह सभी के लिए है।
जब पुल बन रहा है तब। स्वर्ग आश्रम में राम झूला वाली साइड में जो पुल का स्तंभ खड़ा है वह बिलड़ा जी जमीन पर है। बिलड़ा जी को जोंक नामक गाँव के लोगों ने कीमत या दान यह जमीन दी थीं। वह गंगा को बहुत मानते थे। स्वर्ग आश्रम कुछ साल पहले तक जोंक गांव यमकेश्वर ब्लॉक में था। नगर पंचायत बनी तो यह गांव शहर की सूरत में पहचाने जाने लगी। क्योंकि यहाँ बहुत आश्रम बन चुके थे। और यह छोटा शहर पहले ही नक्शे पर आ गया था।
नई दिल्ली से एक पंजाबी परिवार से, 1975 के दरमियान यहाँ संस्कृत पढ़ने एक बालक आया। जो सुख देवा ट्रस्ट के अधीन काम करने लग गया। उसने अपने गुरुओं का इतना विस्वास जीत लिया कि, जिसका नाम चिदा नंद सरस्वती पड़ गया। उसने एक सीमेंट का गंगा में शिव बनाया, और हर श्याम को गंगा आरती करने लगा तो उसके भक्त हर वीवीआइपी ,मुख्यमंत्री होने लगे। वह शिव 2013 की बाढ़ में बह गया। अब फिर गंगा में शिव बन गया है। 
90 के दशक में जब 25, 30 किलोमीटर दूर महल के एक हिस्से में आनंदा होटल बना तब उसके यात्री गंगा आरती में प्रमारथ आने लगे। वो यात्री विदेशी होते थे। उनके लिए आरती गंगा की नई थीं। इससे वह स्थल चमक गया। जब यह चमका तब ऋषिकेश के त्रिवेणी संगम पर आरती होने लगी। मुनि की रेती में भी गंगा आरती होने लगी है। चिदा नंद का कॉन्सेप्ट विस्तार ले रहा है। इसमें स्कूप भी है। क्योंकि गंगा, और आरती दुनिया मे एक ही जगह है।

चंद्र मोहन सिंह नेगी जब यहां पर्वतीय विकास मंत्री थे उन्होंने यमकेश्वर तहसील बनाई। राम झूला से आगे की शिवालय तक सड़क बनाई। यमकेश्वर का बहुत विकास किया। ऋषिकेश से शिवलिंग में भारी भीड़ रहती है। लाखों लोग गंगा जल चढाते है। उस महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण नेगी जी ने किया।
चंद्र मोहन सिंह नेगी जी के पिता श्री जगमोहन सिंह नेगी भी उत्तर प्रदेश में खाद्य मंत्री थे। उन्होंने पहाड़ से स्वत्रन्त्रता आंदोलन की अगुवाई की। वह बहुत निष्ठा वान नेता थे। गांधी जी के करीबी थे।जिस साल वह यूपी में खाद मंत्री बने हिंदुस्तान में अकाल पड़ गया था। यद्यपि पहाड़ अपनी उपजाऊ फसल से परिपूर्ण था, लेकिन जगमोहन जी ने पहाड़ में अतिरिक्त खाध भी भिजवाया। जगमोहन , चन्द्र मोहन जी का गांव स्वर्ग आश्रम से 40 किलोमीटर दूर है। गांव वालों ने उनके घर को एक संग्रहालय बनाया है।
लक्छ्मण झूला पुल पर जब , टेक्नोलॉजी ने रोक लगा दी है तब राम झूला पुल की याद आ जाती है। इसके इतिहास पर भी गौर करने की जरूरत हो जाती है। राम झूला पुल( शिवा नंद पुल ) को बनाने वाले पार्वती य विकास मंत्री श्री चन्द्र मोहन सिंह नेगी जी हैं ।
साभार शीशपाल गुसाई,उत्तराखंड के दिग्गज पत्रकार.