एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

Europe Study Centre - Uttarakhand : जानें बच्चे को विदेश में कैसे पढ़ाएं

विदेश जाकर पढ़ने का चलन पूरी दुनिया में तेज़ी से बढ़ रहा है. एक मोटे अंदाज़े के मुताबिक़, हर साल क़रीब 43 लाख लोग, अपना देश छोड़कर किसी और देश में पढ़ने के लिए जाते हैं.
तो, अगर आप भी अपने बच्चे को विदेश भेजने की सोच रहे हैं, तो हम आपको इससे जुड़े कुछ टिप्स बताते हैं….
• विदेश में पढ़ाई के लिए सबसे ज़रूरी क्या है :
सबसे ज़रूरी है आपके बच्चे के अंदर सेल्फ़ कॉन्फिडेंस होना. वो हज़ारों मील दूर होगा, अजनबियों के बीच होगा. जो दूसरी भाषा बोलते होंगे. अलग-अलग लोगों से तालमेल बिठाना, अपनी दिक़्क़तों का हल खोजना उसे आना चाहिए.

जल्द तैयारी शुरू करें :
अलग-अलग देशों में पढ़ाई का अलग-अलग सिस्टम होता है. वहां के सेमेस्टर अलग टाइम टेबल फ़ॉलो करते हैं. उनकी अपनी शर्तें होती हैं. ऐसे में बेहतर होगा कि जैसे ही ये ख़्याल आए कि बच्चे को पढ़ाई के लिए विदेश भेजना है, इस बारे में अच्छे से रिसर्च कर लें.

• कोर्स के बारे में पूरी रिसर्च करे:
विदेश में पढ़ने के तमाम तरह के प्रोग्राम होते हैं. कुछ कोर्स अंग्रेज़ी में होते हैं तो कई संस्थान एक साथ दो-दो डिग्री की पढ़ाई की इजाज़त भी देते हैं. कई जगह पढ़ाई कठिन होती है, तो कुछ जगह आसान भी. यानी, आप ख़ूब अच्छे से जांच-परख लें, देख लें कि किस देश में जाना है, कौन सा कोर्स करना और किस संस्थान में पढ़ना है, सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद होगा.

• पता कर लें कि आपके कोर्स को आगे मान्यता है या नहीं:
अगर आपका बच्चा किसी शॉर्ट टर्म कोर्स के लिए विदेश जा रहा है, और अपनी बाक़ी की डिग्री लोकल यूनिवर्सिटी से ही लेगा, तो ये ज़रूर पता कर लें, कि विदेश के कोर्स के नंबर उसकी डिर्गी में जुड़ेंगे या नहीं.

• विदेश में पढ़ने का ख़र्च भी जान लें: 
ज़रूरी नहीं कि विदेश में पढ़ाई ख़र्चीली ही हो. कई बार ये सस्ती भी बैठती है. अब जैसे अमरीका का उदाहरण लें. वहां से बहुत से बच्चे, पढ़ने के लिए यूरोप जा रहे हैं. क्योंकि अमरीका के मुक़ाबले यूरोप में पढ़ाई सस्ती है. साथ ही इस बात की दिक़्क़त भी नहीं कि अलग भाषा में पढ़ना होगा. जर्मनी जैसे देश भी अंग्रेज़ी में कोर्स ऑफ़र करते हैं.

• बच्चे का हेल्थ इंश्योरेंस ज़रूर कराएं:
कई लोकल यूनिवर्सिटी, अपने छात्रों को विदेश भेजते वक़्त उनका हेल्थ इन्शोरेंस कराती हैं. वैसे कम्पास बेनेफिट्स ग्रुप और एचटीएच ट्रैवेल इंश्योरेंस जैसी कंपनियां, ख़ास विदेश पढ़ने जाने वालों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस देती हैं.

• बच्चे को मानसिक रूप से तैयार करें:
विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ना, काफ़ी चुनौतीपूर्ण है. आपका बच्चा आपसे दूर, दूसरे देश में होगा, अजनबियों के बीच होगा, लोग दूसरी भाषा बोलेंगे, तो बच्चे को ऐसी चुनौतियों का सामना करना सिखाएं, ताकि विदेश में पढ़ाई के दौरान उसे परेशानी न हो.

• तकनीक का फ़ायदा उठाएं:
संचार क्रांति के इस दौर में किसी से भी कहीं पर भी, किसी भी वक़्त जुड़ना आसान है. तो विदेश पढ़ने गए अपने बच्चे से आप जुड़े रहें. इससे उसे घर से दूरी नहीं महसूस होगी.

• बच्चे को स्थानीय लोगों से घुलने मिलने के लिए कहें:
बेहतर होगा कि आप अपने बच्चों को समझाएं कि वो स्थानीय लोगों से घुले मिले. वहां की भाषा-संस्कृति, खान-पान के बारे में जाने समझे, सीखे. इससे उसे ग्लोबल सिटिज़न बनने में आसानी होगी. ऐसा करके वो तेज़ी से कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ सकता है.

• उम्मीद है कि बच्चों को विदेश में पढ़ाने के बारे में ये टिप्स आपके काम आएंगे...तो...फ़टाफ़ट शुरू कीजिए रिसर्च...🧐
Europe study centre Haldwani…😃
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