एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

अग्रवाल न्यूरो क्लीनिक हल्द्वानी : नशे की प्रवृति के कारण युवाओं में बढ़ा "लकवे" का खतरा

हल्द्वानी: कई बार अच्छा खासा इंसान जो चलता फिरता है एक अटैक उसका शरीर सुन्न कर देता है। ऐसा होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं और बढ़ती उम्र में इसके होने की आशंका और अधिक बढ़ जाती है। लकवा होने के पीछे के क्या कारण हो सकते हैं आइये जानते है.
लकवा कैसे होता है? करीब 85 प्रतिशत लोगों में दिमाग की खून की नली अवरुद्ध होने पर व करीब 15 प्रतिशत में दिमाग में खून की नस फटने से लकवा होता है। दिमाग के एक हिस्से में जब खून का प्रवाह रुक जाता है तो दिमाग के उस हिस्से में क्षति पहुंचती है, जिससे लकवा होता है। दिमाग में रक्त पहुंचाने वाली खून की नली के अंदरूनी भाग में कोलेस्ट्रॉल जमने से मार्ग सकरा होकर अवरुद्ध हो जाता है या उसमें खून का थक्का हृदय से या गले की धमनी से निकलकर रक्त प्रवाह द्वारा पहुंचकर उसे अवरुद्ध कर सकता है। जिन व्यक्तियों को उच्च रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) की बीमारी होती है। उनमें अचानक रक्तचाप बढ़ने से दिमाग की नस फट जाने से लकवा हो जाता है। कुछ मरीजों में दिमाग की नस की दीवार कमजोर होती है जिससे वह गुब्बारे की तरह फूल जाती है। एक निश्चित आकार में आने के बाद इस गुब्बारे (एन्यूरिज्म) के फटने से भी लकवा हो जाता है।
लकवा दो प्रकार का होता है एक तो जो मष्तिष्क की रक्त संचार करने वाली नालियां फट जाती हैं रक्त स्राव हो जाते है जिसे ब्रेन हैम्ब्रेज कहते हैं। अगर ये बड़ा हो और रक्त काफी निकल जाता है तो व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। दूसरा पक्षाघात जो है उसमें जो मष्तिष्क को रक्त संचार करने वाली नालियां है वो बंद हो जाती हैं। इससे रक्त न पंहुचने से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है, जिस हिस्से में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है वो हिस्सा मृत हो जाता और वो हिस्सा काम करना बन्द कर देता है। ये पक्षाघात शरीर के या फिर दायीं तरह होता है या फिर बायीं तरफ हो जाता है। इसमें चेहरा हाथ पैर काम करना बन्द कर देता है।”
लक्षण : 
1-अचानक याददाश्त में कमजोरी आना,
2-बोलने में दिक्कत आना, हाथ या पांव में कमजोरी,
3-आंखों से कम दिखना, व्यवहार में परिवर्तन,
4-चेहरे का टेड़ा होना इत्यादि।
किसी को लकवा आया है तो ये जांच करा लें चेहरा- क्या मरीज ठीक तरह से हंस सकता है, क्या उसका एक तरफ का चेहरा या आंख लटक गई है? भुजाएं- क्या मरीज अपनी दोनों भुजाएं हवा में उठा सकता है? बोली- क्या मरीज स्पष्ट बोल सकता है व आपके बोले हुए शब्दों को समझ सकता है? अगर मरीज में ये लक्षण हैं तो इसके 85 प्रतिशत अवसर हैं कि उसे लकवा हुआ है। इसलिए उसे तुरंत मेडिकल सहायता उपलब्ध कराएं व डॉक्टर को दिखाएं।

करीब 80 प्रतिशत मामलों में लकवों से बचा जा सकता है। 50 प्रतिशत से ज्यादा लकवे अनियंत्रित रक्तचाप या उच्च रक्तचाप के कारण होते हैं। इसलिए उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) का उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही धूम्रपान का त्याग, सैर करने जाना, नियमित व्यायाम व एट्रियल फिब्रिलेशन, जिसमें हृदय की गति अनियंत्रित हो जाती है उसका उपचार भी जरूरी है।काफी मरीजों में लकवा आने के कुछ हफ्तों के अंदर ही थोड़ा सुधार देखने को मिलता है। मरीजों में लकवे के एक या डेढ़ साल के अंदर काफी सुधार आ जाता है। केवल कुछ मरीजों में ज्यादा समय लगता है।
सर गंगा राम अस्पताल के पूर्व विशेषज्ञ डॉ रजत अग्रवाल ने M7न्यूज़ को बताया कि "युवाओं में भी "लकवे" का प्रभाव आज की जीवन शैली में देखा जा रहा है.पहले की अपेक्षा आज "रिस्क फैक्टर" बढ़ गया है.इसके कई कारण है.सबसे बड़ा कारण युवाओं में नशे की बढती आदत है.दिल की बीमारी भी इसी से जुडी हुई है.आज कम उम्र में भी हार्ट अटैक युवाओं को अपनी में  चपेट में ले रहा है.