एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

"बचपन" चाइल्ड डेवलपमेंट क्लिनिक" : ADHD कार्यक्रम में शिक्षकों और अविभावकों ने किया प्रतिभाग

"बचपन" चाइल्ड डेवलपमेंट क्लिनिक" के द्वारा  ADHD (ATTENTION DEFICIT HYPERACTIVITY DISORDER) विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया. ADHD एक मनोवैज्ञानिक समस्या है.अक्सर यह बच्चों में देखी जाती है लेकिन जागरूकता के अभाव में इसे अनदेखा कर दिया जाता है.
इसी के मद्देनजर उत्तराखंड की एक मात्र "न्यूरो डेवेलपमेंट पैडीयाट्रीक" विशेषज्ञ डॉ अपर्णा बिष्ट पांडे द्वारा  सामाजिक जागरूकता को सुनिश्चित करने हेतु इस प्रोग्राम का आयोजन किया.इस अवसर पर एमबीपीजी  डिग्री कालेंज की प्रोफेसर डॉ रश्मि पन्त भी उपस्थित रहीं .इसके अलावा तमाम पेरेंट्स  ने सहभागिता की.
इस पूरी समस्या को डॉ अपर्णा बिष्ट पांडे  ने निम्नवत रखा है.
क्या आपके बच्चे को किसी काम में ध्यान लगाने में कठिनाई महसूस होती है? क्या उसे एक ही जगह पर टिक के रहने में परेशानी होती है? क्या उसके व्यव्हार में असावधानी, हाइपरएक्टविटी और आवेग शामिल हैं। यदि उसे यह समस्याएं हैं और आपको लगता है कि यह उसके दैनिक जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही हैं, तो यह Attention deficit hyperactivity disorder (ADHD) का संकेत हो सकता है। लेकिन थोड़े समझ के साथ आप एडीएचडी (ADHD) से पीड़ित बच्चों को व्याहारिक तौर पे बेहतर बना सकते हैं।एडीएचडी (ADHD) शिशु के लिए समस्या भी है और वरदान भी। एडीएचडी (ADHD) बच्चे में उर्जा का भंडार होता है। यही वजह है की वे अपनी उर्जा को किसी एक दिशा में केन्द्रित नहीं कर पाते हैं।
मगर, सही मार्गदर्शन में एडीएचडी (ADHD) से पीड़ित बच्चा अपने जीवन में बहुत अधिक सफलता प्राप्त कर सकते हैं।आप को ताजुब होगा यह जान कर के की बहुत से ख्याति प्राप्त और अत्याधिक सफल उधमी कभी बचपन में एडीएचडी (ADHD) से पीड़ित थे।
क्या होता है अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर – 
Attention deficit hyperactivity disorder (ADHD) एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को अपने कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है. इस विकार में व्यक्ति के लिए ध्यान देने और अपने आवेगी व्यवहार/impulsive behaviors को नियंत्रित करने में कठिनाई महसूस होती है। वह या तो बेचैन/ restless हो जाता है या लगभग लगातार सक्रिय/ active हो सकता है. आमतोर पर यह समस्या 3 से 4 वर्ष में आरभ हो जाती है.
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर के लक्षण- 
आसानी से विचलित हो जाना , चीजें भूल जाना , और अक्सर एक काम को पूरा किया बिना ही दूसरे में लग जाना
एक काम पर फोकस बनाए रखने में कठिनाई होना
किसी कार्य को व्यवस्थित करने, पूरा करने या कुछ नया सीखने में कठिनाई होना
एक जगह पर टिककर ना बैठना
जरूरत से ज्यादा बोलना या बिना सोचे समझे कुछ भी करना या बोलना
मना करने पर भी गलत काम करते रहना
सवाल पूरा होने से पहले जवाब देना या लगातार दखल देना
आसानी से भ्रमित हो जाना
ये लक्षण आमतोर पर बच्चो में 3 से 4 साल की उम्र के आसपास देखे जाते है. साथ ही यह लक्षण बच्चे के जीवन जैसे घर और स्कूल में नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं. रिसर्च के अनुसार, भारत में लगभग 1 से 12 प्रतिशत तक बच्चों में यह समस्या पाई जाती है.
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर के कारण
एडीएचडी के सही कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन मनोविज्ञानिको के अनुसार एडीएचडी के विकास में कई कारक शामिल हैं जैसे:
Environment – पर्यावरण,Hereditary,जीवनशैली,बिहैवियर आदि.
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का इलाज
अगर आपको लगता है की आपके बच्चे में भी एडीएचडी के लक्षण है तो आपको "बाल रोग विशेषज्ञ" का परामर्श जरुर लेना चाहिए ताकि सही समय पर समस्या को control किया जा सके.
एडीएचडी के प्रबंधन के लिए कई प्रकार की पद्धतियों का सहारा लिया जाता है जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी, पारस्परिक मनोचिकित्सा, फैमिली थेरेपी, कौशल प्रशिक्षण आदि. साथ ही impulsivity को कम करने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बढ़ाने के लिए कई प्रकार की दवाओ का इस्तेमाल भी बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा किया जाता है.