एनपीआरसी चौरा बागेश्वर: 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में बच्चों ने भरी 'मेधा की उड़ान'

सपनों की उड़ान  कार्यक्रम 2024-2025 का आयोजन एनपीआरसी चौरा में किया गया. जिसमे प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक स्कूलों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम के तहत सुलेख हिंदी, अंग्रेजी, सपनों के चित्र, पारंपरिक परिधान, लोकनृत्य, कविता पाठ,कुर्सी दौड़ इत्यादि का आयोजन संपन्न हुआ. सपनों के चित्र, सुलेख हिंदी  प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जीवन कुमार ( राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्लाभैरू ) द्वारा प्राप्त किया गया. इसी विद्यालय की छात्रा दीक्षा ने सुलेख अंग्रेजी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. कुर्सी दौड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरा के छात्र रोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. सपनों के चित्र प्रतियोगित में उच्च प्राथमिक स्तर पर भैरू चौबट्टा के छात्र करण नाथ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसी विद्यालय की छात्रा पूजा  ने सुलेख हिंदी में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस कार्यक्रम में ममता नेगी, भास्करा नंद ,जयंती, कुलदीप सिंह , मुन्नी ओली, सोहित वर्मा , विनीता सोनी, सुनीता जोशी, अनिल कुमार, संगीता नेगी आदि शिक्षक शामिल हुए.

मुहम्मद शादाब की कविता : तेरे क़ातिल को हम हिबुलवत्न कहने लगे

बापू!!! ओ बापू!!
है कहां तू??
इन हवाओं में है? 
इन फ़ज़ाओं में है?
है कहां तू??

क्या मंदिर की घंटी, अज़ानों-मस्जिद या गिरजे की आवाज़ में है??
ओह.... ना ना...
यहाँ नहीं....

अरे...हम भूल गये..... 
......तू तो इंसानियत की किताबों में है.....
ग़रीबों के फ़ाक़ों औ'
अकलियतों-दलितों की चीखों में है.... 
फ़क़त चरिन्दों-परिंदों और पेड़-पौधों की आह में है...
पैग़ंबर-ए-इंसानियत है तू,
तू तो इंसानियत की किताबों में है...

और हाँ..... 
कलम की नोक पर,
वोट की चोट पर
नोट की छाप पर
दफ्तरों की दीवार पर 
...यहाँ भी तो है....

पर..... हाय अफ़सोस !
बिन पढ़े और पढ़ाये ही हमने भुलाया तुझे,
और घटिया लतीफों का मौज़ूं बनाया तुझे.
मज़बूरी का नाम हमने गिनाया तुझे,

पता है तुझे
तेरे क़ातिल को हम हिबुलवत्न कहने लगे....
अब जनाज़ा विचारों का तेरे निकलने लगा,

जनक की भूमि में किसानों की खातिर जो तूने किया,
स्वराज'ओ सुराज का झंडा जो तुमने उठाया,

ऐसा अब कोई नज़र आता नहीं..
तुम लड़े थे फ़िरंगी से हमारे लिये,
हमें मंदिर'ओ मस्जिद से ही फुर्सत नहीं.

इससे ज़्यादा अब और मैं क्या कहूं...
हो सके तो तू आजा दोबारा या फिर भेज दे अपने नायब किसी मुहसिन-ए-इंसानियत को.
ओ बापू !!
है कहां तू??
ओ बापू !!
है कहां तू??

मुहम्मद शादाब