क्या आप भी डेंगी में होने वाली मौत के लिए सिर्फ़ प्लेटलेटों की कमी को ज़िम्मेदार मानते हैं ? क्या आपकी अवधारणा है कि डेंगी की विकरालता का सीधा सम्बन्ध प्लेटलेटों की कमी से है ? ज्यों-ज्यों प्लेटलेट कम , त्यों-त्यों ख़तरा अधिक : बस ?
एक बार फिर एमबीबीएस की एक कथा याद आती है। मेडिसिन के फ़ाइनल प्रोफ़ेशनल का वाइवा चल रहा था। चूँकि लड़के और एग्ज़ामिनर , दोनों को पता था कि परीक्षा-परिणाम सुखद है , इसलिए चर्चा दो काल्पनिक रोगियों पर चलने लगी।
लड़का मेडिसिन की पाठ्यपुस्तकों में रेखांकित बातों को समझता था। उसने तनिक विचार किया और कहा : "सर , सुरेश को पहले बचाऊँगा। मुझे उसकी जान ख़तरे में दिखायी दे रही है।"
एग्ज़ामिनर मुस्कराये। उन्हें छात्र के उत्तर में वह समझ मिल गयी थी , जिसकी उन्हें इच्छा थी। उन्होंने उस लड़के के अपने उत्तर का कारण बताने को नहीं कहा। केवल जाने के लिए हाथ से इशारा किया। बाद में मालूम पड़ा कि उसके मेडिसिन के वाइवा में सर्वाधिक अंक थे।
आम जन और कई बार डॉक्टर भी डेंगी की भयावहता को प्लेटलेटों की कमी से जोड़कर सीधे-सीधे देखते हैं। जिस मौसम में यह रोग फैलता है , बात सीधे और सिर्फ़ प्लेटलेट बढ़ाने की होती है। अमुक वास्तु खाओ प्लेटलेट-काउंट बढ़ जाएगा , अमुक वस्तु की अख़बार में आज चर्चा निकली है। सीधी बात है। डेंगी प्लेटलेटों को कम करता है: प्लेटलेट बढ़ाये रखिए , डेंगी कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।
यही आधा-अधूरा ज्ञान ब्लडबैंकों की नाहक दौड़ लगवाता है। यही डॉक्टरों से अनावश्यक प्लेटलेट चढ़वाने को कहता है। यह एक बोतल नॉर्मल सैलाइन के महत्त्व को डेंगी में समझता ही नहीं , उसके लिए डेंगी और घटे प्लेटलेट पर्यायवाची शब्द हैं।
डेंगी के वायरस को हमसे बहुत लगाव है। वह हमारे घरों में घुसकर हमारे बीच रहता है। और जो अप्रिय कष्टकारी वस्तु हमारे बीच हमारे संग रहती है , उसके निवारण के लिए सरकारों से ज़्यादा हमें प्रयास करना होगा। हमें यह समझना होगा कि डेंगी मलेरिया नहीं है। हमें उसके विषाणु को बूझना होगा और उसे फैलाने वाले मच्छर को भी। हमें यह जानना होगा कि डेंगी में प्लेटलेट क्यों घट जाते हैं। हमें यह भी भीतर बिठाना होगा कि डेंगी में मृत्यु की वास्तविक वजह क्या है।
डेंगी के दो भयावह रूप हेमरेजिक बुख़ार और शॉक सिंड्रोम हैं। इनमें भी शॉक-सिंड्रोम असली यमराज है : जिस दिन आप यह समझ गये , उस दिन आप प्लेटलेट-प्लेटलेट जपना बन्द कर देंगे। स्थिति उतनी सीधी-सपाट नहीं है , जैसी आप समझते हैं।
साभार --- स्कन्द शुक्ल