जिला पंचायत में इस बार भगवा राज लौटकर आएगा या फिर लगातार दूसरी बार कांग्रेस वापसी करेगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही बागेश्वर जिले में भी सियासी तपिश अपने पूरे चरम पर पहुंच चुकी है। आने वाले 6 नवंबर को ब्लॉक प्रमुखों का और 7 नवंबर को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होना निर्धारित हो चुका है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की बात करें तो बागेश्वर जिले की कुल 19 जिला पंचायत सीटों में से 8 सीट भाजपा ने, 6 सीट कांग्रेस ने और 5 सीटें निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीती थी, जिसमें 2 निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा के बागी प्रत्याशी थे। जिला पंचायत में अपनी सरकार बनाने के लिये भाजपा- कांग्रेस को कुल 19 में से 10 सदस्यों की आवश्यकता है और दोनों ही पार्टियों ने अब तक अपने स्तर से पूरा जोर लगाया हुवा है। विश्वस्थ सूत्रों के मुताबिक और आम चर्चा के मुताबिक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीते भाजपा के दोनों बागी प्रत्याशियों ने भाजपा में अपनी घर वापसी कर ली है और इसके अलावा अन्य दो निर्दलीय प्रत्याशी भी भाजपा खेमे में आ सकते हैं। भाजपा के दोनों बागी प्रत्याशियों ने किन शर्तों पर भाजपा में वापसी की है, ये अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन ये लगभग तय हो चुका है कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते दोनों बागी प्रत्याशी भाजपा में वापसी कर चुके हैं और अब तक भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में दिख रही है। भाजपाईयों का दावा है कि 10 से अधिक सदस्यों के साथ वो जिला पंचायत में अपनी सरकार बनाने जा रही है। आपको बता दें कि भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद में कपकोट के बाछम सीट से जीती बसंती देव को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है।
वहीं कांग्रेस ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद में कपकोट के बड़ेत सीट से जीती वन्दना ऐठानी को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है और वन्दना को अध्यक्ष बनाने के लिए कांग्रेस के नेता-रणनीतिकारों ने अपने स्तर से खासा जोर लगाया हुवा है। श्रीमती वन्दना ऐठानी, निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी की धर्मपत्नी हैं। अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस, कितने निर्दलीय प्रत्याशियों को अपने खेमे में शामिल करने में कामयाब रहती है और भाजपा खेमे के सदस्यों को तोड़कर अपने खेमे में शामिल कराने में कामयाब रहती है या नहीं।
गौरतलब है कि हमेशा की तरह इस बार भी अधिकतर जिला पंचायत सदस्यों को एक-दूसरे खेमों की नजरों से बचाए रखने के लिए जिले से बाहर भेजा गया, जिनमें से अधिकतरों ने बाहर ही अपनी दिवाली मनाई और अभी भी वो बाहर ही हैं। किस खेमे ने कितने सदस्यों को कहां-कहां भेजा है, फिलहाल ये स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता, लेकिन ये तय है कि अधिकतर जिला पंचायत सदस्य अभी भी जिले से बाहर ही हैं। भाजपा- कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के नेता- रणनीतिकार यही दावा करते दिख रहें हैं कि जिला पंचायत अध्यक्ष उन्हीं का बनेगा। अब आने वाले 7 नवंबर को साफ ही हो जाएगा कि इस बार जिला पंचायत में भगवा राज लौटकर आएगा या फिर लगातार दूसरी बार कांग्रेस वापसी करती है।
साभार चन्दन सिंह परिहार